रूस-युक्रेन वॉर : यूक्रेन ने किया रूस के एयरबेस पर सबसे बड़ा हमला, 40 फाइटर जेट्स तबाह करने का दावा
कीव/मॉस्को.
रूस-यूक्रेन युद्ध में एक नया मोड़ तब आया जब यूक्रेन ने रविवार को रूस के दो महत्वपूर्ण एयरबेस ओलेन्या और बेलाया पर बड़ा ड्रोन हमला किया और 40 रूसी लड़ाकू विमानों को तबाह करने का दावा किया। कीव इंडिपेंडेंट के अनुसार, इन हमलों में रूस के स्ट्रैटजिक बॉम्बर्स A-50, TU-95 और TU-22 शामिल हैं।
यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसी SBU द्वारा चलाए गए इस ऑपरेशन में FPV (First Person View) ड्रोन्स का इस्तेमाल किया गया। SBU के एक अधिकारी के अनुसार, यह आत्मरक्षा में किया गया जवाबी हमला था, क्योंकि रूस की तरफ से रोज़ाना यूक्रेनी शहरों पर बमबारी की जा रही है।

17,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान का अनुमान
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले में रूस को करीब 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर (17,000 करोड़ रुपये) से अधिक का नुकसान हुआ है। A-50 जैसे विमान बेहद दुर्लभ हैं, रूस के पास ऐसे सिर्फ 10 विमान हैं, जिनमें से एक की कीमत ही 3,000 करोड़ रुपये है।
रूस के एयरबेस बेलाया (4,000 किमी दूर) और ओलेन्या (1,800 किमी दूर) यूक्रेनी सीमा से बहुत अंदर हैं, लेकिन SBU ने इन्हें सटीकता से निशाना बनाया।
हमले की मुख्य बातें
हमले की लागत: शुरुआती अनुमान के अनुसार रूस को $2 बिलियन (17,000 करोड़ रुपए से अधिक) का नुकसान हुआ है।
हवाई ठिकानों की स्थिति: बेलाया एयरबेस यूक्रेनी सीमा से 4,000 किमी और ओलेन्या 1,800 किमी दूर स्थित है।
निशाना बने विमान: TU-95 और TU-22 के अलावा A-50 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा है।
A-50 विमान: रूस के पास ऐसे केवल 10 विमान हैं, जिनकी कीमत लगभग $350 मिलियन (3000 करोड़ रुपये) होती है।
एयरबेस पर लगी आग, लेकिन रूस की ओर से चुप्पी

ओलेन्या एयरबेस में आग लगने की खबरें आई हैं, हालांकि रूसी अधिकारियों ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में रूसी ट्रक से FPV ड्रोन को उड़ते हुए भी देखा जा सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक TU-95 और TU-160 जैसे विमान पुराने हैं, लेकिन इनकी मारक क्षमता बेहद लंबी है। इसलिए इनका नुकसान रूस की रणनीति के लिए बड़ा झटका है। विशेषज्ञों के अनुसार, TU-95 और TU-160 जैसे विमान भले ही पुराने हों, लेकिन इनकी लंबी दूरी की मारक क्षमता और मिसाइल ले जाने की क्षमता इन्हें बेहद घातक बनाती है। इनका गिराया जाना यूक्रेन के लिए एक बड़ी सैन्य उपलब्धि है।

डेढ़ साल की तैयारी वाला ‘ऑपरेशन वेब’
यूक्रेन के इस हमले की योजना 18 महीने पहले से बनाई जा रही थी। इसका कोडनेम “ऑपरेशन वेब” था, जिसकी निगरानी खुद राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और SBU प्रमुख वासिल मालियुक कर रहे थे।
ऑपरेशन की रणनीति
FPV ड्रोन और लकड़ी के मोबाइल कंटेनर रूस के भीतर गुप्त रूप से पहुंचाए गए।
ट्रकों की छतों के नीचे छिपाए गए ये ड्रोन रिमोट कंट्रोल से ऑपरेट किए गए।
हमला शुरू होते ही छतें खुलीं और कामिकेज़ ड्रोन सीधे विमानों की ओर छोड़े गए।
रूस का भी जवाबी हमला, 472 ड्रोन और 7 मिसाइलें दागीं
यूक्रेनी हमले से कुछ ही घंटे पहले रूस ने यूक्रेन पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया था। यूक्रेनी वायुसेना के प्रवक्ता यूरी इग्नाट के अनुसार, रूस ने 472 ड्रोन और 7 मिसाइलें दागीं। इसमें एक मिलिट्री ट्रेनिंग यूनिट को निशाना बनाया गया, जहां 12 सैनिक मारे गए और 60 से अधिक घायल हुए। हमला यूक्रेनी सीमा से 1,000 किमी अंदर किया गया, जिससे रूस की ड्रोन स्ट्राइक क्षमता का अंदाजा लगता है।
यूक्रेनी सेना की स्थिति गंभीर
रिपोर्ट्स के अनुसार, यूक्रेनी सेना इस समय गंभीर मानव संसाधन संकट से जूझ रही है। रूसी ड्रोन लगातार निगरानी कर रहे हैं, जिससे सैन्य टुकड़ियां खुले में मूवमेंट करने से बच रही हैं। किसी भी बड़े समूह पर हमला करने के लिए रूसी पक्ष घात लगाए बैठा है।
यूक्रेनी ग्राउंड फोर्सेज ने घटना की जांच की घोषणा की है और कहा है कि अगर किसी अधिकारी की लापरवाही या गलती सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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