33 साल बाद जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन बैन : यहां अन्ना ने सरकार को घेरा, पहलवानों ने दिया धरना, CJP का प्रोटेस्ट हुआ; 3 नए ठिकाने तय
नई दिल्ली.
अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से लेकर महिला पहलवानों के धरने तक, दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों की पहचान रहा जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं रहेगा। दिल्ली पुलिस ने इसे सूची से हटाकर तीन नए स्थल तय किए हैं, उनमें रामलीला मैदान, उत्तरी दिल्ली का बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड। 11 अक्टूबर को जारी आदेश में गृह मंत्रालय की कमेटी की सिफारिशों का हवाला दिया गया है।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और दूसरे संगठनों के प्रदर्शन चर्चा में हैं। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद पार्टी ने फैसले पर सवाल उठाए हैं।

अब कहां होंगे प्रदर्शन?
दिल्ली पुलिस ने तीन जगहों को नए निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में नामित किया है। इनके लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी की जाएगी।
रामलीला मैदान: मध्य दिल्ली में, संसद से लगभग 4 किमी दूर।
बुराड़ी ग्राउंड: उत्तरी दिल्ली में, संसद से लगभग 14 किमी दूर।
CBD ग्राउंड: पूर्वी दिल्ली के शाहदरा क्षेत्र में, संसद से लगभग 12 किमी दूर।
इसके मुकाबले जंतर-मंतर संसद से करीब 1.5 किमी दूर है। नई जगहों पर प्रदर्शन होने से आयोजकों को भीड़ जुटाने, पहुंच और मीडिया कवरेज की रणनीति नए सिरे से तय करनी पड़ सकती है।
गृह मंत्रालय की कमेटी की सिफारिश पर फैसला
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकों के प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के अधिकार के लिए वैकल्पिक स्थलों की पहचान करने के उद्देश्य से एक कमेटी बनाई थी। इसकी सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को निर्धारित स्थल की सूची से हटाया गया।
नए स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने के नियम और अनुमति की प्रक्रिया संशोधित SOP में स्पष्ट की जाएगी। फिलहाल आदेश का अर्थ यह है कि जंतर-मंतर अब नियमित प्रदर्शन के लिए अधिसूचित स्थल नहीं है।
SIR पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर विवाद
CJP और दूसरे संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा SIR पर रोक की मांग उठाई है। पार्टी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, लेकिन पुलिस ने मंजूरी नहीं दी।
12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने की खबर सामने आई। इसके बाद CJP ने फैसले को मनमाना बताते हुए विरोध किया। पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर असर डालने वाला कदम बताया।
13 अक्टूबर को CJP के नेताओं ने जंतर-मंतर में प्रवेश कर प्रदर्शन करने की कोशिश की। रॉयटर्स और अन्य मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान वरिष्ठ नेताओं आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे समेत कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके भी इस आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी जगह और सुविधाओं पर जोर दिया था

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर पहले भी अदालतों में मामला पहुंच चुका है। जुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर और बोट क्लब क्षेत्र में प्रदर्शनों पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय उचित नियमन की बात कही थी। अदालत ने सार्वजनिक व्यवस्था और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के बीच संतुलन पर जोर दिया था।
अक्टूबर 2026 में वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल पर विचार का मुद्दा भी सामने आया। ऐसे स्थलों में पर्याप्त जगह, पेयजल, शौचालय और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता अहम मानी गई। हालांकि, अदालत की टिप्पणियों को जंतर-मंतर हटाने का सीधा आदेश मानना सही नहीं होगा; स्थल बदलने का निर्णय दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्रालय की कमेटी की सिफारिशों के आधार पर लिया।
1993 में बोट क्लब से जंतर-मंतर तक पहुंचा था विरोध
दिल्ली में बड़े प्रदर्शनों का प्रमुख स्थल कभी इंडिया गेट और विजय चौक के पास बोट क्लब का इलाका हुआ करता था। 25 अक्टूबर 1988 से शुरू हुए किसान आंदोलन में महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान वहां जुटे थे। इसके बाद बोट क्लब पर बड़े जमावड़ों को लेकर सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं बढ़ीं।
1993 में जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख ठिकाना बना। संसद के नजदीक होने के बावजूद यहां प्रवेश और निकास के सीमित रास्तों के कारण भीड़ को नियंत्रित करना अपेक्षाकृत आसान माना गया।
जंतर-मंतर का इतिहास: 1724 में बना था खगोलीय वेधशाला

दिल्ली का जंतर-मंतर महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1724 में बनवाया था। यह खगोलीय वेधशाला है, जहां बने यंत्रों से खगोलीय पिंडों की स्थिति और खगोलीय गणनाओं का अध्ययन किया जाता था। जय सिंह ने जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में भी ऐसी वेधशालाएं बनवाई थीं। मथुरा की वेधशाला अब मौजूद नहीं है।
बाद में जंतर-मंतर के आसपास की सड़क विरोध-प्रदर्शनों का केंद्र बन गई। इसकी पहचान केवल ऐतिहासिक स्मारक तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह देश के सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों की प्रतीक जगह बन गया।
अन्ना आंदोलन से पहलवानों के धरने तक, कई बड़े प्रदर्शन
जंतर-मंतर पर अलग-अलग दौर में कई चर्चित आंदोलन हुए:
अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन (अप्रैल 2011): लोकपाल की मांग को लेकर 5 अप्रैल को अनशन शुरू हुआ। बाद में आंदोलन रामलीला मैदान तक पहुंचा।
निर्भया मामले के बाद प्रदर्शन (दिसंबर 2012): महिला सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर दिल्ली में व्यापक विरोध हुआ।
वन रैंक, वन पेंशन आंदोलन (2015 से): पूर्व सैनिकों ने पेंशन संबंधी मांगों को लेकर धरना दिया।
तमिलनाडु के किसानों का आंदोलन (मार्च-अप्रैल 2017): कर्ज, सूखा राहत और कृषि संकट के मुद्दे उठाए गए; प्रदर्शन करीब 40 दिन चला।
CAA के खिलाफ प्रदर्शन (दिसंबर 2019): नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन हुए।
महिला पहलवानों का धरना (2023): कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पहलवानों ने प्रदर्शन किया।
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