गाजियाबाद में फर्जी दूतावास खोलकर 4 देश बनाएं : हर्षवर्धन जैन गिरफ्तार, 4 लग्जरी गाड़ियां, विदेशी मुद्रा जब्त; खुद को 'वेस्ट आर्कटिक' का बताता था एंबेसडर
गाजियाबाद.
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मंगलवार को एक ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरान कर दिया। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने कविनगर के पॉश इलाके में छापा मारते हुए एक फर्जी दूतावास का पर्दाफाश किया और आरोपी हर्षवर्धन जैन को गिरफ्तार कर लिया। वह खुद को 'वेस्ट आर्कटिक', 'सबोरगा', 'पुलावाविया' और 'लोडोनिया' जैसे फर्जी देशों का डिप्लोमैटिक एंबेसडर बताता था।
इस छापेमारी में STF को VIP नंबर वाली 4 लग्जरी गाड़ियां, 44.70 लाख रुपये नकद, विदेश मंत्रालय की मोहर लगे फर्जी कागजात, विदेशी करेंसी, 34 नकली मुहरें, 18 डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट्स, और माइक्रोनेशन के 12 डिप्लोमैटिक पासपोर्ट मिले हैं।

कैसे हुआ पर्दाफाश?
सूत्रों के अनुसार, STF को केंद्रीय एजेंसियों के इनपुट के आधार पर जानकारी मिली थी कि गाजियाबाद के कविनगर इलाके में एक व्यक्ति फर्जी दूतावास चला रहा है। इसके बाद जांच एजेंसियों ने विदेश मंत्रालय से पुष्टि करवाई और फिर देर रात कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
आरोपी हर्षवर्धन का बैकग्राउंड
47 वर्षीय हर्षवर्धन जैन एक समृद्ध उद्योगपति परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता जेडी जैन गाजियाबाद की जैन रोलिंग मिल के मालिक और राजस्थान में इंदिरा और जेडी मार्बल्स जैसी माइनिंग कंपनियों के संचालक रह चुके हैं। हर्षवर्धन ने गाजियाबाद से BBA और लंदन से MBA किया है।
2000 में हर्षवर्धन की मुलाकात चर्चित व्यक्ति चंद्रास्वामी से हुई, जिनके माध्यम से वह सऊदी अरब के हथियार डीलर अदनान खशोगी और एहसान अली सैयद से जुड़ा। इसके बाद हर्षवर्धन ने लंदन, दुबई, और अफ्रीका के कई देशों में फर्जी कंपनियां बनाकर दलाली का नेटवर्क खड़ा किया।
हवाला नेटवर्क का जाल
STF और ATS की पूछताछ में हर्षवर्धन ने कबूला कि वह शेल कंपनियों के जरिए भारत से विदेश में पैसा भेजता था। विदेश में काम दिलाने के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूलता और फिर उस पैसे को हवाला के माध्यम से बाहर भेजता था।
कैसे करता था लोगों को प्रभावित?
हर्षवर्धन के पास कई देशों की डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगी गाड़ियां थीं। उसके पास प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अन्य VIP लोगों के साथ मॉर्फ की गई तस्वीरें थीं, जिन्हें वह सोशल मीडिया और निजी मुलाकातों में दिखाकर लोगों को प्रभावित करता था।

गाजियाबाद के कविनगर में था 'दूतावास'
फर्जी दूतावास एक किराए की कोठी में चलाया जा रहा था, जिसके बाहर अलग-अलग देशों के झंडे लगे थे और अनूप सिंह नाम की नेमप्लेट लगी थी। इस कोठी से करीब 100 मीटर दूर उसके पिता की आलीशान कोठी भी है, जहां से हर्षवर्धन का आना-जाना था।
VIP लाइफस्टाइल
12 विदेशी घड़ियां (कीमत करीब 5 करोड़ रुपये)
मर्सिडीज समेत 4 लग्जरी गाड़ियां
44.70 लाख रुपये नकद और विदेशी करेंसी (डॉलर, यूरो, दिरहम)
विदेशी राजनयिक सूट और ऑफिस सेटअप
पूछताछ में हुए अहम खुलासे:
फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल: हर्षवर्धन के पास 2 फर्जी प्रेस कार्ड, 2 फर्जी पैन कार्ड और 12 फर्जी पासपोर्ट मिले।
मंत्रालयों तक पहुंच: आरोपी का दावा है कि वह दिल्ली के कई मंत्रालयों में बिना रोक-टोक आता-जाता रहा।
ATS से पूछताछ में बयान: उसने बताया कि कई नौकरशाहों से अच्छी पहचान थी, जिससे मंत्रालयों में प्रवेश मिलता था।
फ्रांस से पीएचडी का दावा: पूछताछ के दौरान उसने फ्रांस से पीएचडी की डिग्री होने का दावा भी किया।
परिवार का व्यापारिक इतिहास
हर्षवर्धन की पत्नी दिल्ली के चांदनी चौक में सोने-चांदी का बड़ा व्यापार करती हैं। उनका बेटा गाजियाबाद के एक निजी स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ता है। हर्षवर्धन के ताऊ बरेली में रहते हैं, जिनसे पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
फर्जी दूतावास क्या होता है?
सच्चे दूतावास किसी देश की सरकार द्वारा विदेशी भूमि पर स्थापित किए जाते हैं, जहां से राजनयिक, वीजा, और पासपोर्ट जैसे काम किए जाते हैं। फर्जी दूतावास किसी गैर अधिकृत व्यक्ति द्वारा खुद को 'राजदूत' बताकर लोगों को भ्रमित करने और धोखाधड़ी करने का जरिया होता है।

क्या कहते हैं अधिकारी?
STF SSP सुशील घुले ने बताया, "यह एक संगठित अपराध है जो लोगों को गुमराह कर राजनयिक पदों के नाम पर दलाली और हवाला जैसे गंभीर अपराधों में लिप्त था। आरोपी के पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।"
केस दर्ज और आगे की कार्रवाई
STF ने IPC की कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है और हर्षवर्धन को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। ATS और STF अब उसके बैंक खातों, रिश्तेदारों, और अन्य संपर्कों की गहन जांच कर रही हैं।
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