पहलगाम हमले पर पूर्व वित्तमंत्री के बयान से बवाल : चिदंबरम बोले- हम क्यों माने वो पाकिस्तान से आए; भाजपा बोली- पाकिस्तान का बचाव कर रही कांग्रेस
नई दिल्ली.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा कश्मीर के पहल्गाम आतंकी हमले को लेकर दिया गया बयान अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि कैसे यह मान लिया गया कि हमलावर पाकिस्तान से आए थे, जबकि अभी तक इसका कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। भाजपा ने इसे “राष्ट्रविरोधी बयान” करार देते हुए कांग्रेस पर पाकिस्तान का बचाव करने का आरोप लगाया है।
क्या कहा था चिदंबरम ने?
शनिवार को एक इंटरव्यू के दौरान पी. चिदंबरम ने कहा -
NIA ने अब तक क्या किया? उन्होंने क्या आतंकियों की पहचान की? क्या पता वे इसी देश के आतंकी हों? हम क्यों मान लें कि वे पाकिस्तान से आए थे? कोई प्रमाण नहीं है।
उन्होंने सरकार से यह भी सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑपरेशन सिंदूर पर चुप क्यों हैं, और संसद में इस पर खुली बहस से क्यों बचा जा रहा है।
भाजपा का तीखा पलटवार
चिदंबरम के बयान के कुछ घंटे बाद ही भाजपा के राष्ट्रीय सूचना प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा:
कांग्रेस को पाकिस्तान को क्लीन चिट देने की इतनी जल्दी क्यों रहती है? जब भी हमारी सेना पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का सामना करती है, कांग्रेस के नेता इस्लामाबाद के वकील ज्यादा लगते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की सोच राष्ट्रहित की बजाय राजनीति से प्रेरित है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक संकेत है।
भाजपा नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं
निशिकांत दुबे (भाजपा सांसद) –
कांग्रेस अब गद्दार संगठन बन चुकी है। जिनके पूर्वज देश की आज़ादी की लड़ाई लड़ते थे, आज वही पार्टी पाकिस्तान की भाषा बोल रही है। राहुल गांधी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से समझौता करते हैं और कांग्रेस पाकिस्तान का पक्ष लेती है।
संजय जायसवाल (भाजपा सांसद) –
अगर चिदंबरम को सवाल पूछने हैं, तो राज्यसभा में पूछें, प्रेस में जाकर पाकिस्तान की पैरवी क्यों कर रहे हैं? सरकार लोकसभा में हर सवाल का जवाब देने को तैयार है।
क्या है ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमला?
पहलगाम आतंकी हमला कुछ सप्ताह पहले हुआ था, जिसमें आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा मार्ग पर सुरक्षाबलों पर हमला किया। इस ऑपरेशन में कई जवान शहीद हुए और कुछ श्रद्धालु घायल हुए थे। इसके बाद भारतीय सेना और खुफिया एजेंसियों ने “ऑपरेशन सिंदूर” नाम से एक विशेष अभियान चलाया जिसमें आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की गई।
सरकार ने इस ऑपरेशन को बड़ी कामयाबी बताया, लेकिन विपक्ष इस पर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है।
चिदंबरम के बयान के दो प्रमुख बिंदु
प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल –
प्रधानमंत्री ऑपरेशन सिंदूर पर चुप क्यों हैं? क्या लोकतंत्र में सवाल पूछना गलत है?
2. युद्धविराम पर अमेरिका की भूमिका –
जिस युद्धविराम की बात हो रही है, उसकी घोषणा भारत सरकार ने नहीं, बल्कि डोनाल्ड ट्रम्प ने की थी। यह चिंता का विषय है।
राजनीतिक विश्लेषण: बयान का मकसद या साजिश?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चिदंबरम का यह बयान सदन में होने वाली बहस से पहले आया, जो कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। यह विपक्ष की ओर से सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश है, ताकि वह ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी सार्वजनिक करे।
लेकिन सवाल उठता है — क्या राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सार्वजनिक बहस उचित है, जब मामला खुफिया जानकारी और विदेशी तत्वों से जुड़ा हो?
संवेदनशील मुद्दों पर बयानबाज़ी
जहां भाजपा इसे राष्ट्रविरोधी वक्तव्य बता रही है, वहीं कांग्रेस का तर्क है कि सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है। लेकिन जब बात आतंकवाद और पाकिस्तान प्रायोजित गतिविधियों की होती है, तब शब्दों की सावधानी और बयानबाज़ी की ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
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