भारत-UK के बीच मुक्त व्यापार समझौता : 99% भारतीय निर्यात को टैरिफ में छूट; PM मोदी और ब्रिटेन के पीएम स्टार्मर की मौजूदगी में हस्ताक्षर
लंदन.
लंदन में गुरुवार को एक ऐतिहासिक अवसर पर भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर हुए। यह हस्ताक्षर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की उपस्थिति में हुए। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
इस मौके पर आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने इसे "एक नई शुरुआत" और "हाई स्कोरिंग पार्टनरशिप" का प्रतीक बताया। क्रिकेट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, "जब भारत और यूके मिले और वह भी टेस्ट सीरीज के दौरान, तो क्रिकेट का जिक्र करना लाजमी है। दोनों देशों के लिए क्रिकेट केवल खेल नहीं, एक पैशन है, ठीक वैसे ही जैसे व्यापार और विकास।"

समझौते के प्रमुख बिंदु: भारत को मिलेगा बड़ा लाभ
भारत के 99% निर्यात पर टैक्स में छूट:
इस FTA के तहत भारत से ब्रिटेन को होने वाले 99% उत्पादों के निर्यात पर अब आयात शुल्क या तो समाप्त कर दिया गया है या उसे काफी हद तक घटा दिया गया है। इससे भारत की रत्न, आभूषण, कपड़ा, फुटवियर, समुद्री उत्पाद, और कृषि उत्पादों को ब्रिटिश बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा।
ब्रिटिश वस्तुओं पर भारत में टैरिफ में कटौती:
भारत ने व्हिस्की, कार, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे ब्रिटिश उत्पादों पर टैरिफ को औसतन 15% से घटाकर 3% तक लाने का वादा किया है। इससे भारत में ब्रिटेन से आयातित सामान सस्ते होंगे।

नौकरियों और MSME को बूस्ट:
यह समझौता भारत में छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच दिलाएगा, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
टेक्नोलॉजी और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग:
यह समझौता हेल्थकेयर, एडुकेशन और टेक्नोलॉजी में दोनों देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करेगा।
क्रॉस वीजा एक्सेस और स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए सुविधा:
भारतीय युवाओं, कलाकारों, योग विशेषज्ञों और शेफ को ब्रिटेन में काम करने के लिए लॉन्ग-टर्म वीजा मिल सकेगा।

3 साल की बातचीत का परिणाम
यह समझौता करीब 3.5 साल की गहन बातचीत के बाद हुआ है। इसकी शुरुआत 13 जनवरी 2022 को हुई थी और इसमें लगभग 14 राउंड की बातचीत हुई। अंतिम राउंड में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के बिजनेस एंड ट्रेड सेक्रेटरी जोनाथन रेनॉल्ड्स की निर्णायक भूमिका रही।
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक समीकरण
2024 में कुल द्विपक्षीय व्यापार: ₹4.6 लाख करोड़
भारत का निर्यात: ₹2.75 लाख करोड़
UK का निर्यात: ₹1.85 लाख करोड़
UK का व्यापार घाटा: ₹90,700 करोड़
भारत से UK को निर्यात होने वाले मुख्य उत्पाद:
रेडीमेड गारमेंट्स
केमिकल्स
ऑटो पार्ट्स
खिलौने
रत्न और आभूषण
समुद्री उत्पाद
UK से भारत को निर्यात होने वाले मुख्य उत्पाद
स्कॉच व्हिस्की और जिन
लक्ज़री कारें
मेडिकल डिवाइसेज़
कॉस्मेटिक्स
मटन और सैल्मन
बिस्किट और पैक्ड फूड

किन-किन वस्तुओं की कीमतें होंगी प्रभावित
व्हिस्की और वाइन: भारत में ब्रिटिश शराब सस्ती होगी, जिससे भारतीय प्रीमियम शराब बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
लक्ज़री कारें: जैसे जगुआर, लैंड रोवर आदि पर टैक्स कटौती के कारण कीमतें घटेंगी।
ब्रिटिश फैशन और फर्नीचर: होमवेयर, इलेक्ट्रॉनिक, इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट अब सस्ते मिलेंगे।
भारतीय रत्न और आभूषण: ब्रिटेन में इनकी बिक्री आसान और सस्ती होगी।
स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन की प्रतिक्रिया
स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन के CEO मार्क केंट ने इसे “पीढ़ी में एक बार मिलने वाला अवसर” बताया। उन्होंने कहा, “UK-India FTA स्कॉच व्हिस्की के लिए सबसे बड़े उपभोक्ता देश भारत में एक नए युग की शुरुआत करेगा।”

समझौते का राजनीतिक और रणनीतिक महत्व
ब्रेक्ज़िट के बाद यह ब्रिटेन के लिए सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौता है। कीर स्टार्मर की सरकार इसे ब्रिटिश अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान का एक प्रमुख आधार मान रही है। वहीं भारत इसे “2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य” को हासिल करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मान रहा है।
भारत को मिलेगा वैश्विक बाजार तक पहुंच
FTA के जरिए भारत की पहुंच विकसित देशों के बाजारों तक बढ़ेगी, जिससे देश की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी। इसके साथ ही, भारतीय उद्योगों को बेहतर तकनीक, सस्ते उपकरण और वैश्विक गुणवत्ता के मानकों को समझने का मौका मिलेगा।
भारत के अन्य FTA पार्टनर्स
भारत अब तक जिन देशों के साथ FTA कर चुका है: | ||
|---|---|---|
श्रीलंका | जापान | मलेशिया |
भूटान | थाईलैंड | ऑस्ट्रेलिया |
दक्षिण कोरिया | सिंगापुर | मॉरीशस |
UAE | ASEAN समूह (10 देश) | यूरोपीय समूह EFTA (4 देश) |
भारत अब अमेरिका, यूरोपीय यूनियन, ओमान, पेरू और इज़राइल के साथ भी FTA को लेकर बातचीत कर रहा है। | ||
FTA के फायदे और नुकसान
फायदे:
टैक्स कम होने से वस्तुओं की कीमतें घटती हैं।
अधिक खरीदारी से अर्थव्यवस्था में गति आती है।
निर्यात में वृद्धि होती है।
रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
उत्पादकों को वैश्विक बाजार मिलता है।
नुकसान:
घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में मुश्किल हो सकती है।
कुछ क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों का वर्चस्व बढ़ सकता है।
नीति निर्माण में स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
आयात पर बढ़ती निर्भरता से विदेशी अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव का असर पड़ सकता है।
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