पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में 'संविधान निर्माता' : ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में अंबेडकर प्रतिमा को लेकर वकीलों के दो गुट आमने-सामने
News Affair Team
Sun, Jun 1, 2025
ग्वालियर.
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति स्थापना को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। यह मुद्दा अब कानूनी बहस से निकलकर जातीय और राजनीतिक तनाव में बदल गया है। वकीलों के दो गुट आमने-सामने हैं — एक पक्ष प्रतिमा स्थापना के पक्ष में है, जबकि दूसरा इसे "प्रक्रियात्मक गलती और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन" बता रहा है।
विवाद की शुरुआत 19 फरवरी 2025 को हुई, जब तत्कालीन चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत ग्वालियर दौरे पर आए। वकील विश्वजीत रतोनिया, धर्मेंद्र कुशवाह और राय सिंह ने उनसे कोर्ट परिसर में डॉ. अंबेडकर की मूर्ति लगाने की मांग की। मौखिक सहमति मिलने पर PWD विभाग ने मूर्ति के लिए फाउंडेशन बना दिया। वकीलों के एक समूह ने चंदा जुटाकर 10 फीट ऊंची मूर्ति भी तैयार करवा ली, जो फिलहाल मूर्तिकार प्रभात राय के स्टूडियो में पुलिस सुरक्षा में रखी है।

विरोध क्यों हो रहा है?
ग्वालियर बार एसोसिएशन का तर्क है कि:
· सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार किसी भी सार्वजनिक स्थान पर किसी महापुरुष की मूर्ति नहीं लगाई जा सकती।
· चीफ जस्टिस की मौखिक अनुमति प्रक्रियात्मक रूप से गलत है।
· बिल्डिंग कमेटी ने स्पष्ट रूप से प्रतिमा स्थापना को अस्वीकार किया है।
· इस प्रक्रिया में बार एसोसिएशन और बिल्डिंग कमेटी को विश्वास में नहीं लिया गया।
10 मई को बार एसोसिएशन ने उस स्ट्रक्चर पर तिरंगा लगाकर अपना विरोध जताया।

जातीय और राजनीतिक रंग लेने लगा विवाद
यह विवाद अब जातिगत रूप लेने लगा है। भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी जैसे संगठन इस विवाद में कूद चुके हैं:
· भीम सेना ने 29 जून को "भीमराव अग्निपथ महासभा" और
· आजाद समाज पार्टी ने 11 जुलाई को "अंबेडकर महापंचायत" बुलाने की घोषणा की है।
वहीं वकीलों के विरोधी गुट ने चेतावनी दी कि "यह कोर्ट है, कोई गली-मोहल्ला नहीं। भीम आर्मी आकर दिखाए।"
शनिवार को भिड़ंत, भीम आर्मी नेता के साथ मारपीट
शनिवार शाम हाईकोर्ट के बाहर भीम आर्मी नेता रूपेश केन अपनी टीम के साथ पहुंचे। वकीलों ने विरोध करते हुए उन्हें घेर लिया और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में उनके साथ मारपीट कर दी। यह घटना कोर्ट परिसर के बाहर सड़क पर हुई, जहां भारी संख्या में पुलिस तैनात थी।
प्रशासन सतर्क, सोशल मीडिया निगरानी में
कलेक्टर रुचिका चौहान और एसएसपी धर्मवीर सिंह ने संवेदनशीलता को देखते हुए:
· सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट पर प्रतिबंध लगाया है।
· किसी भी बाहरी संगठन को प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा रही।
· भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी जैसे संगठनों को जिले की सीमा पर ही रोकने की रणनीति बनाई गई है।
· मूर्ति को 24 घंटे सीसीटीवी और पुलिस निगरानी में रखा गया है।
अब आगे क्या?
· नए चीफ जस्टिस के आने के बाद इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
· बार एसोसिएशन की मांग है कि तब तक कोई मूर्ति स्थापना न की जाए।
· प्रतिमा समर्थक वकीलों ने सांसद भारत सिंह कुशवाह को ज्ञापन देकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
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