महाशिवरात्रि पर बागेश्वर धाम में 305 ‘ब्राह्म विवाह’ : मंच पर 30-30 जोड़े; संतों की मौजूदगी और राजदूतों की कतार
News Affair Team
Sun, Feb 15, 2026
खजुराहो.
महाशिवरात्रि के मौके पर मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में इस बार 305 जोड़ों का सामूहिक विवाह हो रहा है। तीन दिन से चल रहे इस आयोजन का रविवार को समापन है। कुछ ही देर में सात फेरे होंगे और फिर विदाई के साथ कार्यक्रम खत्म होगा।
लेकिन यह सिर्फ शादी समारोह नहीं था—यह आस्था, आयोजन और आध्यात्मिक ब्रांडिंग का बड़ा मंच भी बना।

मंच पर 30 जोड़े, भावुक पल और आशीर्वाद
वरमाला के लिए दूल्हा-दुल्हन को 30-30 की संख्या में मंच पर बुलाया गया। मंत्रोच्चार के बीच पहले दुल्हन ने दूल्हे को माला पहनाई, फिर दूल्हे ने दुल्हन को।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री हर जोड़े से मिले। एक दूल्हा उनके पैरों में गिर पड़ा। किसी ने गले लगकर आशीर्वाद लिया, तो कोई रो पड़ा। माहौल भावुक था—और कैमरे हर भाव कैद कर रहे थे।
संतों की मौजूदगी ने इसे धार्मिक महोत्सव का रूप दे दिया।
“शादी नहीं, ब्राह्म विवाह है”—रामभद्राचार्य की नाराजगी
समारोह में जगद्गुरु रामभद्राचार्य भी पहुंचे। उन्होंने मंच से एक बात पर आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा—“यहां शादी नहीं हो रही है। शादी शब्द का प्रयोग मत कीजिए। यहां ब्राह्म विवाह हो रहा है।”
उन्होंने मनुस्मृति का हवाला देते हुए बताया कि आठ प्रकार के विवाहों में ब्राह्म विवाह सर्वोत्तम है। कथावाचकों से उन्होंने अनुरोध किया कि ‘शादी’ शब्द का इस्तेमाल न करें।
धार्मिक शब्दावली पर यह सख्ती बताती है कि आयोजन सिर्फ सामाजिक नहीं, वैदिक पहचान के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है।
नेपाली जोड़ा और 50 बाराती
305 जोड़ों में एक नेपाली जोड़ा भी शामिल है। खास बात यह कि विवाह नेपाली और भारतीय दोनों रीति-रिवाजों से हो रहा है। दोनों देशों के पुजारी मौजूद हैं। नेपाल से आए 50 बाराती इस आयोजन के साक्षी बने।
यह दृश्य बताता है कि आयोजन अब अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का रूप ले चुका है।

नौ देशों के राजदूत मंच पर
समारोह में अर्जेंटीना, चिली, पेरू, उरुग्वे, इक्वाडोर, कोलंबिया, पनामा, दक्षिण अफ्रीका समेत नौ देशों के राजदूत मौजूद रहे।
उरुग्वे के अल्बर्टो एंटोनियो गुआनी अमरिला, अर्जेंटीना के मारियानो अगस्टिन कजिनो, पैराग्वे के फ्लेमिंग राउल डुआर्टे रामोस सहित कई विदेशी प्रतिनिधि मंच पर दिखे।
यह दृश्य किसी आध्यात्मिक कूटनीति जैसा लगा—जहां विवाह समारोह वैश्विक उपस्थिति के साथ हो रहा था।

हर बेटी को 3 लाख का सामान, 30 हजार की FD
आयोजन की एक बड़ी चर्चा इसका आर्थिक पैकेज भी है।
हर बेटी को करीब 3 लाख रुपए का घरेलू सामान
हर जोड़े को 30 हजार रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट
पहली FD खुद रामभद्राचार्य ने एक जोड़े को भेंट की।
महाराष्ट्र की अमरावती लोकसभा सीट से सांसद नवनीत कौर राणा ने हर जोड़े को 11-11 हजार रुपए की सहायता दी।
धीरेंद्र शास्त्री को नेग और नोटों की माला
मंच पर एक और दृश्य चर्चा में रहा। संतों ने धीरेंद्र शास्त्री को नोटों की माला पहनाकर स्वागत किया।
धीरेंद्र शास्त्री ने रामभद्राचार्य की चरण वंदना की और आशीर्वाद लिया। बदले में रामभद्राचार्य ने उन्हें नेग भी दिया।
यह परंपरा और प्रतिष्ठा का आदान-प्रदान था—जहां गुरु-शिष्य भाव सार्वजनिक रूप से दिखाई दिया।

“अगली बार 1001 बेटियों की शादी”
रामभद्राचार्य ने घोषणा की कि 29 जून से 13 जनवरी तक वे एकांतवास में रहेंगे। उन्होंने कहा—“अगली बार जब आऊंगा तो धीरेंद्र शास्त्री की शादी में आऊंगा।”
मंच पर यह बात सुनकर हंसी और तालियां दोनों गूंजीं।
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक कैंसर अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं होगा, अगला विवाह समारोह नहीं होगा। भविष्य में 1001 बेटियों के विवाह का लक्ष्य रखा गया है।
होटल मैनेजर दूल्हा क्या बोला?
नौगांव के एक होटल मैनेजर दूल्हे ने कहा कि वह यहां इसलिए आया क्योंकि उसे संतों का आशीर्वाद मिलेगा। उसके मुताबिक, “यहां शादी करना सौभाग्य है। बागेश्वर धाम की कृपा से जीवनसाथी मिला।”
यह बयान आयोजन की सामाजिक स्वीकार्यता और धार्मिक भरोसे को दर्शाता है।
सातवां साल, बढ़ता पैमाना
यह सामूहिक विवाह आयोजन लगातार सातवें साल हो रहा है। हर साल जोड़ों की संख्या और आयोजन का दायरा बढ़ रहा है।
धार्मिक आस्था, सामाजिक सहयोग और सार्वजनिक प्रदर्शन—तीनों का मिश्रण इस कार्यक्रम में दिखा।
महाशिवरात्रि पर 305 जोड़ों के सात फेरे सिर्फ वैवाहिक बंधन नहीं थे, बल्कि एक बड़े धार्मिक-सामाजिक मंच का प्रदर्शन भी थे।
अब सबकी नजर अगली घोषणा पर है—क्या सचमुच अगली बार 1001 जोड़े होंगे? और क्या तब तक कैंसर अस्पताल बनकर तैयार होगा?
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