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13th April 2026

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चीन दुनिया का सबसे बड़ा कर्ज वसूलने वाला देश : 94 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बकाया; पाकिस्तान, श्रीलंका सहित 75 सबसे गरीब देशों से करेगा वसूली

News Affair Team

Mon, Jun 2, 2025

बीजिंग/सिडनी.

चीन अब दुनिया का सबसे बड़ा कर्ज वसूलने वाला देश बन चुका है। ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक लोवी इंस्टीट्यूट की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में चीन विकासशील देशों से रिकॉर्ड 3 लाख करोड़ रुपये की वसूली करेगा, जिसमें से 1.9 लाख करोड़ रुपए केवल 75 सबसे गरीब देशों से वसूले जाएंगे।

चीन द्वारा पिछले एक दशक में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत दिए गए कर्ज अब विकासशील देशों के लिए आर्थिक संकट का कारण बन चुके हैं। वर्तमान में विकासशील देशों पर चीन का कुल 94 लाख करोड़ रु. का कर्ज बकाया है। इन देशों में कई को स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं में कटौती करनी पड़ रही है ताकि वे चीन का कर्ज चुका सकें। 46 गरीब देशों ने 2023 में अपने टैक्स राजस्व का 20% हिस्सा केवल कर्ज अदायगी में खर्च किया।

42 देश जीडीपी से भी ज्यादा कर्ज के बोझ तले दबे

·         42 देशों पर चीन का कर्ज उनकी जीडीपी के 10% से भी अधिक है।

·         2013 में शुरू हुए BRI प्रोजेक्ट से आज 150 देश जुड़ चुके हैं, जो विश्व की कुल GDP का 40% प्रतिनिधित्व करते हैं।

·         2017 से चीन ने विश्व बैंक और IMF को पीछे छोड़ते हुए खुद को सबसे बड़ा ऋणदाता बना लिया है।

टॉप-10 में से दो देश डिफॉल्ट कर चुके, 8 और जोखिम में

2022 तक, 60% चीनी कर्ज उन देशों को मिला जो वित्तीय संकट की स्थिति में हैं, जबकि 2010 में यह आंकड़ा केवल 5% था। चीन के कर्ज पर ब्याज दर 4.2% से 6% तक जाती है, जबकि OECD (ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट) की औसत दर केवल 1.1% है। उच्च ब्याज दरों के कारण कई देशों को पुनर्भुगतान में भारी समस्याएं रही हैं।

कर्ज के जाल में फंसे देश

·         पाकिस्तान: 2024 में चीन ने 17,000 करोड़ रुपये के ऋण की परिपक्वता बढ़ाई। ऋण पुनर्गठन जारी।

·         अंगोला: मासिक भुगतान कम करने पर सहमति बनी।

·         श्रीलंका: 2022 में डिफॉल्ट किया; हंबनटोटा पोर्ट 99 वर्षों के लिए चीन को सौंपना पड़ा

·         जाम्बिया: 2020 में डिफॉल्ट; ऋण पुनर्गठन जारी।

·         लाओस: GDP से अधिक (100%+) कर्ज, वित्तीय संकट में।

 कर्ज के नाम पर मदद नहीं, बल्कि नियंत्रण की रणनीति

1. मदद नहीं, सिर्फ कर्ज

चीन विकास सहायता नहीं, बल्कि बाजार दर पर कर्ज देता है। 2017 तक उसके कुल ऋण का केवल 12% ही विकास फंडिंग था। शेष पर ऊंचा ब्याज, कम ग्रेस पीरियड और त्वरित भुगतान की शर्तें लागू होती हैं।

 2. संपत्ति गिरवी

कई देशों ने प्राकृतिक संसाधनों और संपत्तियों को कर्ज के बदले गिरवी रखा। वेनेजुएला और अंगोला इसका उदाहरण हैं।

 3. अघोषित कर्ज:

चीन अक्सर सरकारी कंपनियों या संयुक्त उद्यमों को ऋण देता है, जिसकी गारंटी सरकार देती है। इससे देश की वास्तविक देनदारी छिपी रह जाती हैलगभग GDP के 5.8% के बराबर अघोषित कर्ज।

 4. पारदर्शिता की कमी:

BRI के 35% प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार, शोषण और सामाजिक अस्थिरता के शिकार हैं। चीन स्थानीय भलाई से अधिक अपने लाभ पर केंद्रित रहता है।

 5. रणनीतिक नियंत्रण:

चीन उन देशों को प्राथमिकता देता है जो प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण, या राजनीतिक रूप से कमजोर होते हैं। इससे वह भौगोलिक प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करता है।

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