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फैजान ने जीती स्पेलिंग बी प्रतियोगिता : 13 साल के बच्चे ने अमेरिका का सबसे कठिन कॉम्पटीशन अपने नाम किया

News Affair Team

Sat, May 31, 2025

वॉशिंगटन डीसी.

अमेरिका की प्रतिष्ठित और दुनिया की सबसे कठिन मानी जाने वाली प्रतियोगितास्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बीका 100वां संस्करण भारतीय मूल के 13 वर्षीय छात्र फैजान जकी ने जीत लिया। उन्होंने फ्रेंच शब्द ‘eclaircissement’ (एक्लेयरसिसमेंट) की सही स्पेलिंग बताकर खिताब अपने नाम किया। इस शब्द का मतलब होता है- किसी चीज को स्पष्ट करना या समझाना।

हैदराबाद मूल के फैजान पिछले साल भी इस प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचे थे, लेकिन टाईब्रेकर राउंड में ब्रुहत सोमा से हार गए थे। इस बार उन्होंने 21 राउंड तक लगातार सभी शब्दों की सही स्पेलिंग बताई और जीत हासिल की। जैसे ही उन्होंने अंतिम शब्द बोला, वे खुशी में मंच पर गिर पड़े।

फैजान 2001 के बाद पहले ऐसे प्रतिभागी हैं जिन्होंने एक साल रनर-अप रहने के बाद अगली बार खिताब जीता हो।

45 लाख रुपये का इनाम

इस जीत के साथ फैजान को 52,500 डॉलर (करीब 45 लाख रुपये) का इनाम मिला। पिछले साल उन्हें 25,000 डॉलर मिले थे, जिससे उनकी कुल इनामी राशि 77,500 डॉलर (66.31 लाख रुपये) हो गई है।

रोजाना 6 घंटे की प्रैक्टिस, डिक्शनरी की हर परत से वाकिफ

फैजान की तैयारी बेहद अनुशासित रही। उन्होंने रोजाना 6 घंटे अभ्यास किया। 30 शब्दों की साझा सूची के अलावा उन्होंने डिक्शनरी में मौजूद दुर्लभ और अप्रचलित शब्दों को भी रटा।

उनके कोच स्कॉट रेमर, सैम इवांस और सोहम सुखांतंकर बताते हैं कि फैजान की भाषा और शब्दों को लेकर दीवानगी अद्वितीय है। मां अर्शिया कहती हैं, “उसने 2 साल की उम्र में पढ़ना शुरू कर दिया था और 3 साल की उम्र में दुनिया के देशों और राजधानियों के नाम याद कर लिए थे।पिता अनवर ने कहा, “उसे शब्दों के पीछे की कहानी में भी रुचि है।

सिर्फ इनाम नहीं, जुनून है शब्दों का

पिछली बार फैजान को हराने वाले उनके मित्र ब्रुहत सोमा ने कहा, “उसे इनाम की नहीं, शब्दों की परवाह है। खाली समय में भी वह ऐसे शब्द ढूंढता है जिनके पूछे जाने की संभावना तक नहीं होती।

लगातार चौथी बार भारतीय मूल के छात्र की जीत

फैजान की जीत के साथ ही भारतीय-अमेरिकन छात्रों का दबदबा एक बार फिर कायम रहा।

·         2022: हरिनी लोगन

·         2023: देव शाह

·         2024: ब्रुहत सोमा

·         2025: फैजान जकी

पिछली 36 स्पेलिंग बी प्रतियोगिताओं में 30 बार भारतीय मूल के छात्र विजेता बने हैं, जो इस समुदाय की भाषा और शिक्षा में गहरी रुचि को दर्शाता है।

1925 से शुरू हुई परंपरा

'नेशनल स्पेलिंग बी' की शुरुआत 1925 में हुई थी। तब सिर्फ 9 बच्चों ने हिस्सा लिया था और विजेता को 500 डॉलर के सोने के सिक्के मिले थे।
1985 में बालू नटराजन पहले भारतीय-अमेरिकी विजेता बने। तब से अब तक 29 भारतीय मूल के बच्चे यह खिताब जीत चुके हैं।

फैजान बोले: “मैं खुद से कहता हूं- मैं कर सकता हूं

अपनी जीत पर फैजान ने कहा, “जब मैं नर्वस होता हूं, तो खुद से कहता हूं- मैं यह शब्द जानता हूं, मैं कुछ भी कर सकता हूं। यह आत्मविश्वास मेरे भीतर जुनून और ऊर्जा भर देता है।

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