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19th October 2026

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उधार की साइकिल से ब्रॉन्ज जीतने वाली आयती की कहानी : जर्जर ट्रैक पर राज्य स्तरीय साइकिलिंग; बोलीं- स्पोर्ट्स साइकिल होती तो गोल्ड पक्का था

News Affair Team

Tue, Sep 1, 2026

रायपुर.

जयंती स्टेडियम के वेलोड्रम में राज्य स्तरीय शालेय ट्रैक साइकिलिंग स्पर्धा हो रही है, लेकिन यहां खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं ने खेल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीमेंट का ट्रैक कई जगह से उखड़ा हुआ है और आसपास घास उग आई है। दूसरी ओर, राज्यभर से पहुंचे कई खिलाड़ियों के पास प्रतियोगिता के स्तर की रेसिंग साइकिल तक उपलब्ध नहीं है।

इसी बदहाली के बीच बस्तर की आयती भारती ने अपनी प्रतिभा और हौसले से सबका ध्यान खींचा। प्रारंभिक स्पर्धा में उन्होंने तीसरा स्थान हासिल किया। खास बात यह रही कि आयती ने यह प्रदर्शन किसी प्रोफेशनल रेसिंग साइकिल पर नहीं, बल्कि सामान्य लेडीज साइकिल से किया।

सहेली से साइकिल उधार लेकर पहुंचीं प्रतियोगिता में

आयती के पास खुद की स्पोर्ट्स साइकिल नहीं है। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने अपनी सहेली से सामान्य साइकिल उधार ली। इतना ही नहीं, रेस के दौरान सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया गया हेलमेट भी उनका अपना नहीं था। उन्होंने यह हेलमेट एक साथी खिलाड़ी से लिया था।

इसके बावजूद आयती ने शुरुआती मुकाबले में तीसरा स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी के बावजूद प्रतिभा और मेहनत के दम पर खिलाड़ी आगे बढ़ सकते हैं।

किसान परिवार की बेटी, सुबह 4 बजे से करती हैं अभ्यास

बस्तर की रहने वाली आयती किसान परिवार से आती हैं। पिछले तीन-चार साल से वह साइकिलिंग की तैयारी कर रही हैं। बेहतर प्रशिक्षण और संसाधनों के अभाव में वह बस्तर की सड़कों पर ही रोज सुबह 4 से 5 बजे तक अभ्यास करती हैं।

आयती का कहना है कि अगर उन्हें भी अच्छी स्पोर्ट्स साइकिल और जरूरी सुविधाएं मिलें तो वह अपनी क्षमता का बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। उनका मानना है कि संसाधन मिलते तो वह प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल कर सकती थीं।

सवाल यह कि खिलाड़ी ऐसे कैसे जीतेंगे गोल्ड?

आयती की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी के संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि प्रदेश की खेल व्यवस्था के सामने बड़ा सवाल भी खड़ा करती है। एक ओर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रतियोगिता स्थल का ट्रैक बदहाल है और खिलाड़ियों के पास जरूरी खेल उपकरण तक नहीं हैं।

साइकिलिंग जैसे खेल में जहां साइकिल और ट्रैक दोनों प्रदर्शन के लिए बेहद अहम हैं, वहां खिलाड़ियों का सामान्य साइकिल से राज्य स्तरीय मुकाबले में उतरना व्यवस्था की कमी को सामने लाता है।

प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत है उसे सही संसाधन और प्रशिक्षण देने की। सवाल यही है कि जब खिलाड़ी उधार की साइकिल और जर्जर ट्रैक के भरोसे तैयारी करेंगे, तो प्रदेश के बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल की दौड़ में कैसे आगे निकलेंगे?

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