शरद पूर्णिमा 25 की रात खीर रखें, 26 अक्टूबर को करें स्नान-दान : श्रीकृष्ण के महारास और मां लक्ष्मी की पूजा से जुड़ी है मान्यता; जानें शुभ काम और मंत्र
धर्म डेस्क.
आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। हिंदू मान्यताओं में इस रात का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसी रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था। वहीं, एक अन्य धार्मिक विश्वास के अनुसार, मां लक्ष्मी रात में पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और श्रद्धा से उनकी पूजा करने वाले भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
इस साल शरद पूर्णिमा की तिथि 25 और 26 अक्टूबर को पड़ने के कारण पूजा, व्रत और खीर चंद्रमा की रोशनी में रखने को लेकर पंचांगों में मतभेद बताए जा रहे हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, 25 अक्टूबर की रात खीर रखने की परंपरा निभाई जा सकती है, जबकि 26 अक्टूबर की सुबह स्नान, दान और पूजन से जुड़े धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं। पूजा या व्रत की सही तारीख तय करने के लिए स्थानीय पंचांग और पूर्णिमा तिथि के समय को देखना उचित रहेगा।

श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रचाया था महारास
शरद पूर्णिमा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं से जुड़ा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्वापर युग में शरद ऋतु की पूर्णिमा की रात वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास किया था। चंद्रमा की उजली चांदनी में हुई इस लीला को प्रेम, भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित रासलीला को भक्त और भगवान के आध्यात्मिक संबंध के रूप में देखा जाता है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया से प्रत्येक गोपी को यह अनुभव कराया कि वे उनके साथ ही नृत्य कर रहे हैं।
मथुरा के पास वृंदावन स्थित निधिवन भी इसी परंपरा से जुड़ी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां रात में श्रीकृष्ण रासलीला करते हैं। इसी वजह से सूर्यास्त के बाद निधिवन को दर्शनार्थियों के लिए बंद कर दिया जाता है और रात में वहां रुकने की अनुमति नहीं होती।

शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की पूजा क्यों होती है?
शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी की आराधना के लिए भी खास माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इस रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ घरों में श्रद्धा से उनका स्वागत करने वाले भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
इसी मान्यता के चलते लोग घरों की सफाई करते हैं, दीपक जलाते हैं और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा करते हैं। कई श्रद्धालु रात में जागकर भजन-कीर्तन और मंत्र जाप भी करते हैं।
मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान कमल के गट्टे की माला से इस मंत्र का 108 बार जाप करने की परंपरा है:
ॐ महालक्ष्म्यै नमः।
श्रद्धालु इस पूजा को घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना से करते हैं।


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