केरलम के लोकभवन में नॉन-वेज पर रोक : नए राज्यपाल के शपथ लेते ही बदला मेन्यू; राज्य में 97% लोग खाते हैं मांसाहार
नेशनल न्यूज डेस्क.
केरलम के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के पद संभालने के कुछ ही घंटे बाद लोकभवन की रसोई में मांसाहारी खाना बनाने और परोसने पर रोक लगाए जाने का मामला सामने आया है। राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, माथुर के शाकाहारी होने के कारण यह बदलाव किया गया। हालांकि, फैसले पर कांग्रेस और CPI(M) ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि राज्यपाल यह तय नहीं कर सकते कि लोगों को क्या खाना चाहिए।
मामले ने इसलिए भी ध्यान खींचा है, क्योंकि केरलम में मछली और अन्य मांसाहारी भोजन खानपान की संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की करीब 97% आबादी मांसाहारी भोजन करती है। इस सूची में तेलंगाना 98.7% के साथ पहले और पश्चिम बंगाल 98.6% के साथ दूसरे स्थान पर है।
कांग्रेस बोली- राज्यपाल ने हद पार कर दी
AICC महासचिव और अलप्पुझा से सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकभवन में मांसाहारी भोजन पर रोक के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केरलम की खानपान संस्कृति अलग है और तटीय राज्य होने के कारण यहां मछली आसानी से उपलब्ध होती है।
वेणुगोपाल के मुताबिक, राज्य के लोग अपनी पसंद से शाकाहारी या मांसाहारी भोजन चुनने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि केरलवासियों की खानपान की आदतों पर रोक लगाने की कोई भी कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती।
राज्यपाल कार्यालय ने क्या वजह बताई?
राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, लोकभवन की रसोई में तैयार भोजन मुख्य रूप से राज्यपाल और उनके निजी स्टाफ के कुछ सदस्यों के लिए होता है। अन्य कर्मचारी या तो अपने घर से खाना लाते हैं या बाहर भोजन करते हैं।
सूत्रों ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के खानपान पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। उनके अनुसार, रसोई के मेन्यू में बदलाव राज्यपाल की व्यक्तिगत खानपान संबंधी पसंद के कारण किया गया।
शपथ लेने के बाद सामने आया फैसला
ओम प्रकाश माथुर ने शुक्रवार सुबह केरलम के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। केरल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सौमेन सेन ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के कुछ घंटों बाद लोकभवन की रसोई में मांसाहारी भोजन को लेकर बदलाव की जानकारी सामने आई।
केरलम में 97% लोग मांसाहारी हैं। देश में सबसे ज्यादा नॉन-वेज खाने वाले लोग तेलंगाना में हैं।

स्रोत: सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS)। यह सूची प्रमुख राज्यों के उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है; सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
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