Gen Alpha बोले- ‘हम गूगल पर दुनिया देखते हैं, अपना हक जानते हैं’ : MP में 62 KM पैदल कलेक्टर से मिलने निकले छात्र; हॉस्टल की बदहाली समेत कई शिकायतें
News Affair Team
Mon, Aug 24, 2026
भोपाल.
मध्यप्रदेश में स्कूली छात्रों के अपनी समस्याओं को लेकर खुलकर आवाज उठाने का मामला सामने आया है। बड़वानी के सेंधवा में सोमवार दोपहर करीब 12 बजे एकलव्य आदर्श विद्यालय जामली के छात्र-छात्राएं कलेक्टर से मिलने के लिए करीब 62 किलोमीटर दूर बड़वानी तक पैदल मार्च पर निकल पड़े।
छात्रों के हाथों में किताबों की जगह अपनी मांगों से जुड़े पोस्टर थे। हालांकि सेंधवा से करीब 18 किलोमीटर दूर पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जांच और समाधान का भरोसा दिया।

छात्रों का कहना है कि वे इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों से दुनिया की जानकारी हासिल करते हैं। उनका कहना था, “हम गूगल पर दुनिया देखते हैं, हम जानते हैं हमारा हक क्या है।”
छात्रों ने कहा कि अब वे सिर्फ डांट सुनकर चुप नहीं बैठेंगे। वे अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं और इसके लिए अधिकारियों तक सीधे अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं।
हॉस्टल में स्मार्ट क्लास, पानी और खाने को लेकर शिकायत
पैदल मार्च कर रहे छात्रों ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि उन्हें कई बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इनमें स्मार्ट क्लास, साफ पानी और गुणवत्तापूर्ण भोजन जैसी मांगें शामिल हैं।
कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें प्रताड़ित किया जाता है और जातिसूचक शब्दों से बुलाया जाता है। छात्रों का कहना है कि वे ऐसी स्थिति को अब स्वीकार नहीं करेंगे।

एसडीएम-एसडीओपी समेत अधिकारी मौके पर पहुंचे
छात्रों के पैदल मार्च की सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। एसडीएम, एसडीओपी, तहसीलदार समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर उन्हें समझाने और वापस लौटने के लिए कहा। छात्रों का कहना था कि वे अपनी शिकायत अधिकारियों के सामने रखना चाहते हैं। इसके बाद प्रशासन ने मामले की जांच कराने और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया।
MP में हाल के दिनों में बच्चों के प्रदर्शन के कई मामले
बड़वानी की घटना अकेली नहीं है। अगस्त में मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों में छात्र-छात्राएं स्कूल, हॉस्टल, सड़क, परिवहन और दूसरी मूलभूत सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं।

भोपाल: 300-400 छात्रों ने सड़क पर किया प्रदर्शन
18 अगस्त को भोपाल में रीजनल स्कूल के करीब 300 से 400 छात्र-छात्राएं स्कूल को केंद्रीय विद्यालय संगठन यानी KVS में मर्ज किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में सड़क पर उतर आए थे। छात्रों के हाथों में ‘सेव डीएमएस’ समेत कई पोस्टर थे। उन्होंने मांगें नहीं माने जाने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी थी।
धार: आधी रात हॉस्टल से निकलीं 35 छात्राएं
16 अगस्त की देर रात धार के कुक्षी में आदिवासी छात्रावास की करीब 35 छात्राएं खिड़कियों से निकलकर थाने की ओर पैदल चल पड़ी थीं। छात्राओं ने आरोप लगाया कि 50 बेड के हॉस्टल में करीब 140 लड़कियां रह रही हैं। कई बार एक बिस्तर साझा करना पड़ता है। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता और मेन्यू के मुताबिक खाना नहीं मिलने की शिकायत भी की।
17 अगस्त को धार के केसवी स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावास की छात्राओं ने भी मूलभूत सुविधाओं, भोजन और अन्य अव्यवस्थाओं को लेकर एसडीएम कार्यालय का घेराव किया था।
छतरपुर: बच्चों ने मंत्री का काफिला रोका
14 अगस्त को छतरपुर के चंदला विधानसभा क्षेत्र में स्कूली बच्चों ने राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला रोककर स्कूल तक पक्की सड़क की मांग रखी थी। बच्चों के सड़क पर आने के बाद मंत्री ने उनसे बातचीत की। मंत्री के मुताबिक सड़क का काम निजी जमीन के विवाद के कारण रुका था। उन्होंने विवाद सुलझने के बाद सड़क सुधार के निर्देश दिए।
उज्जैन: 300 से ज्यादा छात्राओं ने घेरा कलेक्टर परिसर
14 अगस्त को उज्जैन के सराफा क्षेत्र के स्कूल को दाऊदखेड़ी शिफ्ट करने के प्रस्ताव के विरोध में 300 से ज्यादा छात्राएं कलेक्टर परिसर पहुंचीं। छात्राओं का कहना था कि स्कूल शहर से 12 से 15 किलोमीटर दूर होने से सुरक्षा, परिवहन, समय और अतिरिक्त खर्च की समस्या बढ़ेगी। प्रदर्शन के दौरान दो छात्राओं के बेहोश होने की बात भी सामने आई। बाद में स्कूल शिफ्टिंग का फैसला टाल दिया गया।
सागर: डेढ़ किमी कीचड़ भरे रास्ते पर चक्काजाम
17 अगस्त को सागर के खुरई तहसील के निवारी गांव में छात्र-छात्राओं ने स्कूल तक पक्का रास्ता नहीं होने के विरोध में चक्काजाम किया। मुख्य सड़क से हाई स्कूल तक करीब डेढ़ किलोमीटर रास्ता बारिश में कीचड़ और पानी से भर जाता है। प्रशासन ने बारिश तक पंचायत भवन में कक्षाएं लगाने का आश्वासन दिया।
विदिशा: किराया बढ़ने पर छात्राओं ने बसें रोकीं
12 अगस्त को विदिशा के सिरोंज में ग्रामीण इलाकों से स्कूल आने वाली छात्राओं ने निजी बसों का किराया बढ़ाए जाने का विरोध किया। छात्राओं ने बसें रोककर किराया कम करने की मांग की।
उनका कहना था कि पहले 10 से 15 रुपए किराया लगता था, जिसे अचानक बढ़ा दिया गया। छात्राओं के मुताबिक बढ़ा किराया गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है।

आखिर क्यों प्रदर्शन कर रही है Gen Alpha?
इन घटनाओं में राजनीतिक मुद्दों के बजाय बच्चों की रोजमर्रा की जरूरतें केंद्र में हैं। स्कूल तक सड़क, हॉस्टल में जगह, साफ पानी, अच्छा भोजन, सुरक्षित परिवहन और कम किराया जैसे मुद्दों को लेकर छात्र सीधे प्रशासन के सामने अपनी बात रख रहे हैं। कई मामलों में प्रदर्शन के बाद प्रशासन को तत्काल कदम उठाने पड़े। सागर में वैकल्पिक कक्षाओं की व्यवस्था का आश्वासन मिला, उज्जैन में स्कूल शिफ्टिंग का फैसला टला और छतरपुर में सड़क सुधार के निर्देश दिए गए।

बच्चों के प्रदर्शन को सिर्फ गुस्सा मानना ठीक नहीं
इन घटनाओं को केवल छात्रों का आक्रोश मानकर नजरअंदाज करना आसान है, लेकिन इसके पीछे बदलती पीढ़ी की सोच भी दिखाई देती है। इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों से लगातार जानकारी हासिल करने वाले बच्चे अब अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सवाल पूछ रहे हैं।
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