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24th August 2026

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भारत में 1.31 लाख नई जॉब, 61 हजार खत्म; नोमुरा रिपोर्ट ने दिखाया अलग ट्रेंड

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AI से बदल रहा रोजगार का बाजार : भारत में 1.31 लाख नई जॉब, 61 हजार खत्म; नोमुरा रिपोर्ट ने दिखाया अलग ट्रेंड

News Affair Team

Mon, Aug 24, 2026

नई दिल्ली.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर सबसे बड़ी चिंता नौकरियों पर पड़ने वाले असर को लेकर है। माना जा रहा है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल से बड़ी संख्या में पारंपरिक नौकरियां खत्म हो सकती हैं। हालांकि जापानी फाइनेंशियल सर्विस कंपनी नोमुरा की रिपोर्ट तस्वीर का दूसरा पहलू सामने रखती है। रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया में AI ने जितनी नौकरियां खत्म की हैं, उससे ज्यादा नए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।

रिपोर्ट में भारत, चीन और फिलीपींस को उन देशों में शामिल किया गया है जहां AI से रोजगार में बढ़ोतरी देखने को मिली है। 2022 से अगस्त 2026 के बीच के आंकड़ों में AI से जुड़े बदलावों के दौरान करीब 1.31 लाख नई नौकरियां सामने आईं, जबकि करीब 61 हजार नौकरियां खत्म हुईं।

फ्रेशर्स के लिए चुनौती, अनुभवी कर्मचारियों की मांग बढ़ी

AI के कारण रोजगार बाजार में बदलाव सभी स्तरों पर एक जैसा नहीं है। भारत में सबसे ज्यादा असर एंट्री-लेवल नौकरियों पर दिखाई दे रहा है। 651 आईटी कंपनियों के सर्वे के मुताबिक, 55% कंपनियों ने फ्रेशर्स की भर्ती घटाई है, जबकि सिर्फ 14% कंपनियों ने सीनियर पदों पर नियुक्तियां कम की हैं।

नोमुरा ने इस बदलाव को K-शेप्ड स्प्लिट बताया है। यानी रोजगार बाजार दो अलग दिशाओं में बढ़ रहा है। एक ओर फ्रेशर्स और कम अनुभव वाले कर्मचारियों के लिए अवसर घट रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अनुभवी कर्मचारियों की मांग बढ़ रही है। कंपनियां अब केवल तकनीकी योग्यता के बजाय मैनेजमेंट, बिजनेस प्रोसेस और इंडस्ट्री की गहरी समझ रखने वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं।

साइलेंट फायरिंग का बढ़ता चलन

AI के दौर में कंपनियां बड़े पैमाने पर पुराने कर्मचारियों को निकालने के बजाय नई नियुक्तियां कम कर रही हैं। इसे साइलेंट फायरिंग के तौर पर देखा जा रहा है। इसका असर खास तौर पर कॉलेज कैंपस प्लेसमेंट पर पड़ा है और कई कंपनियों ने फ्रेशर्स की कैंपस हायरिंग घटाई है। यानी रोजगार का संकट हमेशा छंटनी के रूप में सामने नहीं आ रहा। कई जगह इसका असर नई भर्तियों के अवसर कम होने के रूप में दिखाई दे रहा है।

बैंकिंग और टेक सेक्टर पर ज्यादा असर

AI आधारित ऑटोमेशन का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज तथा टेक्नोलॉजी सेक्टर में देखा जा रहा है। रिपोर्ट के आंकड़ों में AI से प्रभावित नौकरियों में करीब 58% हिस्सेदारी बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की और 30% टेक्नोलॉजी सेक्टर की बताई गई है।

डेटा एंट्री, चैट आधारित कस्टमर सपोर्ट, जूनियर कोडिंग, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग और कई रूटीन बैक-ऑफिस कामों पर ऑटोमेशन का दबाव बढ़ रहा है। इसके उलट मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, हेल्थकेयर और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में मानवीय भूमिका फिलहाल ज्यादा मजबूत बनी हुई है।

AI से बनने वाली 90% से ज्यादा नई नौकरियां टेक सेक्टर में

AI सिर्फ नौकरियां खत्म नहीं कर रहा, बल्कि नए रोजगार भी पैदा कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक AI की वजह से बनने वाली नई नौकरियों में 90% से ज्यादा हिस्सेदारी टेक्नोलॉजी सेक्टर की है।

भारत में डेटा एनोटेशन, भाषा विज्ञान और AI से जुड़ी IT सर्विसेज में नए अवसर सामने आ रहे हैं। हालांकि चीन की स्थिति भारत से कुछ अलग है। वहां कंपनियां AI मॉडल के विकास और नई तकनीक तैयार करने के लिए हाई-स्किल्ड ग्रेजुएट्स की भर्ती पर ज्यादा जोर दे रही हैं। भारत में फिलहाल AI से जुड़े सपोर्ट और सर्विस आधारित रोजगार अधिक दिखाई दे रहे हैं।

दक्षिण कोरिया में युवाओं पर ज्यादा असर

AI के कारण रोजगार बाजार में उम्र के आधार पर भी बड़ा अंतर देखने को मिला है। बैंक ऑफ कोरिया की रिसर्च के मुताबिक, दक्षिण कोरिया में AI का इस्तेमाल ज्यादा करने वाले क्षेत्रों में 15 से 29 साल के युवाओं की करीब 2.11 लाख नौकरियां खत्म हुईं, जबकि 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए करीब 2.09 लाख नए रोजगार बने। यह ट्रेंड बताता है कि AI के दौर में सिर्फ डिग्री या उम्र नहीं, बल्कि अनुभव और जटिल समस्याओं को समझने की क्षमता भी रोजगार में अहम भूमिका निभा सकती है।

भारत के सामने अवसर भी, चुनौती भी

भारत का IT सेक्टर लंबे समय से बैक-ऑफिस और सर्विस आधारित कामों पर मजबूत रहा है। लेकिन AI अब ऐसे कई रूटीन और दोहराव वाले काम खुद करने में सक्षम हो रहा है। इससे पारंपरिक IT नौकरियों पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।

दूसरी ओर भारत के पास बड़ा इंजीनियरिंग और टेक टैलेंट पूल है। चुनौती यह है कि इस प्रतिभा को AI के अनुरूप समय रहते अपस्किल किया जाए।

आने वाले वर्षों में AI केवल छोटे और दोहराव वाले कामों तक सीमित नहीं रहेगा। एजेंटिक AI सिस्टम के विकास के साथ मशीनें खुद निर्णय लेने और कई चरणों वाले काम पूरे करने में सक्षम हो रही हैं। ऐसे में रोजगार बाजार में सबसे ज्यादा मांग उन लोगों की हो सकती है जो AI को इस्तेमाल करने के साथ बिजनेस, मैनेजमेंट और इंडस्ट्री की समझ भी रखते हों।

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