फरवरी में फिर चढ़ी महंगाई : 3.21% पर पहुंची रिटेल इंफ्लेशन; युद्ध और खाने-पीने की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन
बिजनेस डेस्क.
महंगाई की कहानी: जनवरी से फरवरी तक क्या बदला?
अगर आप पिछले कुछ महीनों से बाजार जा रहे हैं तो एक बात जरूर नोटिस की होगी, सब्जी, दूध, दाल या रोजमर्रा की चीजों के दाम धीरे-धीरे ऊपर जा रहे हैं। अब इस एहसास को आंकड़ों ने भी सही साबित कर दिया है।
12 मार्च को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में भारत की रिटेल महंगाई दर 3.21% हो गई है। इससे एक महीना पहले यानी जनवरी में यह 2.74% थी। यानी एक महीने में महंगाई की रफ्तार थोड़ी तेज हो गई।
महंगाई का यह आंकड़ा कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आधार पर निकाला जाता है, जो यह बताता है कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली चीजों के दाम कितनी तेजी से बदल रहे हैं।
लेकिन इस बार महंगाई की चर्चा सिर्फ सब्जी या राशन तक सीमित नहीं है। इसकी वजह दुनिया में चल रही जंग और ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता भी है।
युद्ध का असर: तेल महंगा हुआ तो सब महंगा
अभी मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ा हुआ है। खासकर Israel, Iran और United States के बीच चल रहे टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला तो कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
और अगर ऐसा हुआ तो असर सीधा भारत की जेब पर पड़ेगा। क्योंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है। जब तेल महंगा होता है तो पेट्रोल और डीजल महंगे हो जाते हैं, ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाता है और माल ढुलाई महंगी हो जाती है।
जब ट्रक का खर्च बढ़ता है तो बाजार में आने वाली हर चीज फल, सब्जी, दूध, अनाज, सबकी कीमत ऊपर चली जाती है।
खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाई महंगाई
फरवरी में महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह फूड इंफ्लेशन रही। जनवरी में खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर 2.13% थी, जो फरवरी में बढ़कर 3.47% हो गई। यानी एक महीने में लगभग डेढ़ फीसदी की बढ़ोतरी।
इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, सब्जियों के दाम में उतार-चढ़ाव, दूध और डेयरी उत्पादों की कीमतें, अनाज और दालों की लागत। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर मौसम और सप्लाई सामान्य रही तो आने वाले महीनों में इसमें कुछ राहत मिल सकती है।
गांव और शहर में महंगाई का फर्क
महंगाई का असर पूरे देश में एक जैसा नहीं होता। गांव और शहर में इसकी रफ्तार अलग-अलग होती है। फरवरी के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में महंगाई थोड़ी ज्यादा रही।
ग्रामीण महंगाई: जनवरी में 2.73% → फरवरी में 3.37%
शहरी महंगाई: जनवरी में 2.75% → फरवरी में 3.02%
इसका एक कारण यह भी है कि गांवों में खाने-पीने की चीजों पर खर्च ज्यादा होता है। जब फूड इंफ्लेशन बढ़ती है तो उसका असर ग्रामीण इलाकों में ज्यादा दिखाई देता है।
महंगाई नापने का तरीका भी बदल गया
दिलचस्प बात यह है कि यह आंकड़ा महंगाई मापने के नए फॉर्मूले के तहत जारी हुआ है। सरकार ने 2024 को नया बेस ईयर बनाकर महंगाई के बास्केट में कई बदलाव किए हैं।
पहले महंगाई मापते समय खाने-पीने की चीजों का वजन ज्यादा था।
पहले: 45.9%
अब: 36.75%
इसके उलट अब हाउसिंग, बिजली और गैस जैसे खर्चों का महत्व बढ़ा दिया गया है।
पुराने जमाने की चीजें बाहर, डिजिटल खर्च अंदर
महंगाई के बास्केट में कुछ चीजें हटाई भी गई हैं।
क्या हटाया गया?
वीसीआर
ऑडियो कैसेट
यानी वो चीजें जो अब लगभग इतिहास बन चुकी हैं।
क्या जोड़ा गया?
अब आधुनिक जीवनशैली के खर्च भी महंगाई में शामिल हैं
OTT सब्सक्रिप्शन
डिजिटल स्टोरेज
ऑनलाइन सेवाएं
यानी अब आपकी नेटफ्लिक्स या डिजिटल क्लाउड जैसी सेवाओं का खर्च भी महंगाई के आंकड़ों में शामिल होगा।
रिजर्व बैंक क्या सोच रहा है?
भारत में महंगाई पर नजर रखने की जिम्मेदारी Reserve Bank of India की भी होती है। आरबीआई का लक्ष्य है कि महंगाई दर 4% के आसपास रहे। फिलहाल फरवरी की महंगाई 3.21% है, यानी यह अभी भी तय सीमा के भीतर है।
हालांकि आरबीआई का अनुमान है कि आने वाले समय में इसमें थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।अनुमान के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में महंगाई करीब 4% और अगली तिमाही में लगभग 4.2% तक जा सकती है। लेकिन फिलहाल यह स्थिति ऐसी नहीं है कि तुरंत ब्याज दरों में बड़ा बदलाव किया जाए।
महंगाई आखिर बढ़ती कैसे है?
महंगाई का मूल नियम बहुत सरल है, डिमांड और सप्लाई। अगर बाजार में किसी चीज की मांग ज्यादा हो और सप्लाई कम हो तो कीमत बढ़ जाती है।
उदाहरण के लिए- अगर टमाटर की फसल कम हुई और लोग खरीदना चाहते हैं तो कीमत बढ़ जाएगी। लेकिन अगर उत्पादन ज्यादा हुआ और खरीददार कम हैं तो कीमत गिर सकती है। यही नियम पूरी अर्थव्यवस्था पर लागू होता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल महंगाई नियंत्रण में जरूर है, लेकिन दुनिया की स्थिति अनिश्चित है। अगर मध्य-पूर्व का तनाव बढ़ा, तेल महंगा हुआ और सप्लाई चेन प्रभावित हुई तो आने वाले महीनों में महंगाई फिर तेज हो सकती है। अभी के लिए राहत की बात बस इतनी है कि महंगाई अभी भी उस सीमा के भीतर है जिसे भारत की अर्थव्यवस्था संभाल सकती है।
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