छुपे हुए चार्ज से जेब पर बोझ : क्विक कॉमर्स कंपनियां कर रहीं वसूली; रेन चार्ज, हैंडलिंग, स्मार्ट फी, मेंबरशिप- सामान से ज्यादा फीस
बिजनेस डेस्क.
किराना और आवश्यक वस्तुएं मिनटों में घर पहुंचाने वाली क्विक कॉमर्स कंपनियां – जैसे Zepto, Blinkit, Swiggy Instamart – अब छुपे हुए शुल्कों के जरिए ग्राहकों की जेब पर भार डाल रही हैं।
दिल्ली के आईटी प्रोफेशनल राकेश ने Zepto से 57 रुपए के स्नैक्स ऑर्डर किए, लेकिन उनका बिल 200 रुपए तक पहुंच गया। इसमें शामिल थे:
₹13 हैंडलिंग चार्ज
₹35 स्मार्ट कार्ट फी
₹75 डिलीवरी चार्ज
₹1 मेंबरशिप फीस
और अलग से GST
ब्लिंकिट पर 'फ्री डिलीवरी', लेकिन सर्ज चार्ज और हैंडलिंग फीस अलग!
दिल्ली के अजीत ने Blinkit से ₹306 की आइसक्रीम मंगवाई। डिलीवरी चार्ज शून्य था, पर ₹9 हैंडलिंग और ₹30 सर्ज चार्ज जुड़ गया। बिल बन गया ₹346।
इन छिपे हुए शुल्कों को डार्क पैटर्न कहा जाता है, जिसमें कंपनियां अंतिम चरण पर शुल्क जोड़ती हैं।
कंपनियों का तर्क: हर माह 1500 करोड़ कैश बर्न
कंपनियां कहती हैं कि वे छूट और सुविधा देने के एवज में हर महीने ₹1300–₹1500 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं। BNP Paribas की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में क्विक कॉमर्स मार्केट ₹70,000 करोड़ का रहेगा और 2028 तक ₹2.6 लाख करोड़ पहुंचने की संभावना है।
62% ग्राहक छुपे शुल्कों से परेशान: सर्वे रिपोर्ट
LocalCircles के सर्वे के अनुसार:
62% ग्राहकों ने बताया कि उन्हें सुविधा शुल्क देना पड़ा
300 रुपए का ऑर्डर, अतिरिक्त शुल्क के चलते ₹400–₹450 का हो रहा
सुविधा शुल्क का औसत: 3% लेन-देन राशि तक
ये शुल्क रिफंड योग्य नहीं होते, चाहे सामान लौटाया जाए
बड़ा खतरा: डार्क पैटर्न से उपभोक्ता भ्रमित
भारत सरकार ने 13 प्रकार के डार्क पैटर्न को चिन्हित किया है। इनमें प्रमुख हैं:
ड्रिप प्राइसिंग: कम कीमत दिखाकर बाद में शुल्क जोड़ना
रेन चार्ज: बारिश के दौरान शुल्क
सर्ज चार्ज: मांग अधिक होने पर अचानक शुल्क
बास्केट स्नीकिंग: बिना अनुमति के शुल्क जोड़ना
बढ़ती प्रतिस्पर्धा में दबाव: रिलायंस, अमेजन की एंट्री से चुनौती
रिलायंस की JioMart, Amazon Now और Flipkart Minutes जैसे प्लेयर्स अब क्विक कॉमर्स में उतर रहे हैं।
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