August 11, 2022

विभिन्न प्रांतों के पारंपरिक पकवानों से महकी देवभूमि ; सांझा चूल्हा संस्कृति को जीवंत करते तीर्थ यात्री

हरिद्वार,मन में आस्था का भाव और भगवान के दर्शन के लिए अलग-अलग प्रांतों से भारी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंच रहे है। चारधाम यात्रा पर आये श्रद्धालु अपने साथ अपनी रसोई भी लेकर आये है। उनके पकवानों की खुषबू से यात्रा मार्ग महक हुआ है। चारधाम यात्रा के लिए राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश प्रांतों से अलग-अलग संस्कृति से जुड़े हजारों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचे हैं। ये तीर्थयात्री बड़े-बड़े समूहों में यात्रा के लिए आयें हैं। कोरोना संक्रमण काल के दो वर्ष बाद चारधाम श्रद्धालुओं की भारी आमद से गुलजार हो रहे हैं। हजारों किलोमीटर दूर दूसरे प्रांत से पहुंच रहे श्रद्धालु यही उम्मीद लेकर आए हैं कि उन्हें अगले रोज यात्रा पर जाने का अवसर प्राप्त होगा। लेक्नि धामों में भारी भीड़ के चलते उन्हें जगह-जगह रूककर अपनी यात्रा करनी पड़ रही है। श्रद्धालु जिस स्थान पर रूक रहे है, वही पर अपनी रसोई लगाकर कर तरह-तरह के पकवान और पारंपरिक भोजन बना रहे हैं। इस दौरान तीर्थ यात्रा पर आये सभी लोग मिलकर साझा चूल्हा संस्कृति को जीवित रखें हुए है। बड़े तवे पर एक साथ यात्रा में समुह की महिलाएं रोटियां बनती हैं और सभी सदस्यों को एक साथ भोजन परोसा जाता है। महिलाओं की टोली सभी को भोजन कराने के बाद ही भोजन करती है। खाना बनाने में महिलाएं ही अपितु पुरुष भी अपनी भूमिका बखूबी निभा रहे है। समुह में सभी लोग मिलकर कार्य करते है। उनके पकवानों की खुषबू से आस-पास के लोगों भी अपने आपको रोक नही पाते और उनके पास आकर उनसे बन रहे पकवानों और पारंपारिक भोजन के बारे में पुछने लगते है। यात्रा में अधिकतर बुजुर्ग लोग ही होते है। जोकि होटलों और रेस्टोरेंटों में खाने में परहेज करते है। इसलिए वे लोग यात्रा के दौरान अपने रसोई साथ लेकर ही चलते है।

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